(1) क़ैद होकर भी निग़ाहों में !!!
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क़ैद होकर भी निग़ाहों में ,
तू आज़ाद रहता है....!
ग़म -ए -इश्क़ पाकर भी ,
तू आबाद रहता है… !!!
जश्न -ए -महफ़िल में भी ,
तुझे अवसाद रहता है ..!
टूटा दिल , तू नही टूटा , भला कैसे
बनके फौलाद रहता है.…… !!!
न करना इश्क़ तू अब से ,
इसमें विवाद रहता है..!
काबिल से काबिल बंदा भी ,
इश्क़ में बरबाद रहता है …!
प्रिय हैं श्री राम , वो क्षेत्र जहाँ
राम नाम का उन्माद रहता है ..!
कि बाशिंदे -दून होकर भी ,
दिल तेरा फैज़ाबाद रहता है....!!!
ये बता "नीरज" कि
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भीड़ में रहकर भी ,
तू कैसे अपवाद रहता है ..!
ग़म-ए-इश्क़ पाकर भी ,
तू भला कैसे आबाद रहता है……! भला कैसे आबाद रहता है…!!!
________नीरज " फ़ैज़ाबादी "__________

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